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हमारे बारे में

अध्यक्ष के विचार -

हाथकरघा एक सदियों पुरानी भारतीय परम्परा है जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता का प्रतिनिधित्व करती है हाथकरघा केवल बुनाई का उपकरण नहीं है बल्कि बुनकरों की कौशल और रचनात्मकता का प्रतीक है, जो सामाजिक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते है। वर्तमान समय में हाथकरघा को जीवित रखने में सहकारी समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बुनाई करने वाले बुनकर विभिन्न सहकारी समितियां के माघ्यम से संगठित है। और इन्ही बुनकर समितियों का प्रदेश स्तरीय संध बना हुआ है।जो कि छ.ग. राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन संध मर्यादित रारयपुर के नाम से जाना जाता है। जहां विभिन्न जिलों के लगभग 300 बुनकर समितियां जुडी हुई है। इसी संध के द्वारा शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत प्रदेश के सभी बुनकर सहकारी समितयों को बुनाई कार्य हेतु धागा प्रदाय किया जाता है। और बुनकरों को सतत काम मिलता रहा है।

संस्था की विकास यात्रा एवं उपलिब्धी

भविष्य की योजनाएं

समिति के द्वारा एैसा प्रयास किया जा रहा है कि बुनकरों को उच्चगुणवत्ता के बुनाई प्रशिक्षण प्रदान किया जावे जिससे वे बाजार के अनुरुप वस्त्रों को निर्माण कर सके एवं अपनी अलग पहचान बना सके। कपड़ा के क्षेत्र मे काम करने वाली बड़ी कंपनियों से अनुबंध करके विभिन्न प्रकार के धागे से विभिन्न कपडों का निर्माण किया जा सके।

साथ ही एैसा प्रयास किया जा रहा है कि समिति में ही धागा की रंगाई एवं प्रोसेसिंग का कार्य भी किया जावे जिससे तैयार वस्त्र को बाजार में उपलब्ध कराने में परेशानी न होवे।

श्री साई बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, रेवाडीह का परिचय

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संस्था का पंजीयन -